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दक्षिण भारत में भू-खतरों पर एनसीईएस में कार्यशाला शुरू

राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान केंद्र में चतुर्थ काल की पृथ्वी प्रणाली और भूवैज्ञानिक जोखिमों पर विशेषज्ञ कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला दक्षिण भारत के भूगर्भीय खतरों को समझने और मूल्यांकन करने के लिए समर्पित है।

LSN India · 28 September 2026

दक्षिण भारत में भू-खतरों पर एनसीईएस में कार्यशाला शुरू

एनसीईएस (राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान केंद्र) में 'चतुर्थ काल की पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाएं और दक्षिण भारत में भू-खतरे' विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला भारतीय भूविज्ञान और पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच प्रदान करती है।

कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य चतुर्थ काल की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करना और दक्षिण भारतीय क्षेत्र में संभावित भू-खतरों की पहचान करना है। प्रतिभागी भूकंप, भूस्खलन, तटीय अपरदन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इस कार्यशाला के माध्यम से विशेषज्ञ समुदाय पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में नवीनतम शोध निष्कर्षों को साझा करने और आपातकालीन प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने का अवसर प्राप्त करेगा। दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भूगर्भीय जोखिमों का आकलन करने के लिए यह पहल अत्यंत प्रासंगिक है।