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एनसीएलएटी ने दिवाला संहिता के 'स्वच्छ राज्य' सिद्धांत को बरकरार रखा
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण ने सिंटेक्स इंडस्ट्रीज के शेयरहोल्डर की मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दिवाला समाधान योजना के तहत समाप्त किए गए शेयरहोल्डर्स को अपने अधिकार वापस नहीं मिल सकते।
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राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अपना फैसला देते हुए दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के अंतर्गत 'स्वच्छ राज्य सिद्धांत' को बरकरार रखा है। इस सिद्धांत के अनुसार, दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत समाप्त किए गए पूर्व शेयरहोल्डर्स अपने अधिकारों को पुनः स्थापित नहीं कर सकते।
अपील खारिज करते हुए अदालत ने केरल के एक निवेशक के दावे को नकार दिया, जिसने सिंटेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड के 1,35,000 इक्विटी शेयरों के लिए लगभग 110 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था। ये शेयर कंपनी की दिवाला समाधान योजना के तहत समाप्त कर दिए गए थे।
एनसीएलएटी ने अपने फैसले में कहा कि वह शेयरहोल्डर जिनके इक्विटी को दिवाला समाधान योजना के तहत समाप्त किया गया है, कंपनी अधिनियम की प्रक्रियाओं के माध्यम से अपने अधिकारों को पुनः प्राप्त नहीं कर सकते। यह प्रावधान तब लागू होता है जब बोलियां स्वीकार की जा चुकी हों और समाधान योजना को नई स्वामित्व के साथ अंतिम रूप दिया जा चुका हो।
न्यायाधिकरण ने आईबीसी की धारा 238 का हवाला देते हुए कहा कि दिवाला संहिता को कंपनी अधिनियम 2013 सहित अन्य सभी कानूनों पर प्रमुखता प्राप्त है। इस फैसले से दिवाला कानून के तहत शेयरहोल्डर्स के अधिकारों की स्थिति और स्पष्ट हुई है।