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एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा को संपत्ति बेचने से रोका
व्यक्तिगत दिवालिएपन मामले में एनसीएलटी की विशेष पांच सदस्यीय पीठ ने एसल ग्रुप के अध्यक्ष को संपत्ति हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध लगाया है। न्यायाधीशों में सहमति न होने के कारण अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।
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राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की विशेष पांच सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालिएपन मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। एनसीएलटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की अगुवाई वाली पीठ ने एसल ग्रुप के अध्यक्ष को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी संपत्ति का हस्तांतरण करने से रोक दिया है।
गत सप्ताह एनसीएलटी ने एक पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत लेनदारों को चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति से लगभग 6.25 करोड़ रुपये की वसूली होगी। यह राशि करीब 22,006 करोड़ रुपये के कुल दावों के मुकाबले काफी कम है।
चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि को गलतफहमी का शिकार बनाया गया है। उनके अनुसार यह आंकड़ा व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित है, जो उन्होंने एसल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के लिए दी थी। यह सीधे उनके द्वारा लिए गए कर्ज को दर्शाता नहीं है।
एनसीएलटी की पीठ ने कहा है कि सभी सदस्यों में सहमति नहीं होने के कारण अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए सभी पक्षों से जवाब मांगा गया है।