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मेटा और इंस्टाग्राम के खिलाफ एनसीपीसीआर की जांच, जानें क्या है कानूनी आधार
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जांच के लिए किन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। एनसीपीसीआर को बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा मेटा और इंस्टाग्राम की जांच बाल सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण की जा रही है। आयोग को भारतीय संविधान और विभिन्न कानूनों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों सहित किसी भी संगठन को समन जारी करने की शक्ति है।
एनसीपीसीआर को बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत व्यापक जांच और निरीक्षण की शक्तियां दी गई हैं। आयोग किसी भी कंपनी या व्यक्ति से जानकारी मांग सकता है, दस्तावेजों की जांच कर सकता है और गवाहों से पूछताछ कर सकता है जहां बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होने का संदेह हो।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय बन गई है। एनसीपीसीआर अनुचित सामग्री, ऑनलाइन शोषण और अन्य नुकसानदेह प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जो बाल कल्याण को प्रभावित करते हैं।
जांच प्रक्रिया में आयोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उनके बाल सुरक्षा नीतियों, डेटा सुरक्षा उपायों और कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकता है। आयोग के पास अपनी जांच के आधार पर सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करने का भी अधिकार है।