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राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्रस्तावित किया लिंग-निरपेक्ष बाल देखभाल अवकाश
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने लिंग-निरपेक्ष बाल देखभाल अवकाश की नीति का प्रस्ताव दिया है। आयोग 2030 तक 5 लाख आंगनबाड़ी सीटें उपलब्ध कराने का लक्ष्य रख रहा है।
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राष्ट्रीय महिला आयोग ने बाल देखभाल में महिलाओं के बोझ को कम करने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव रखा है। आयोग की ओर से सुझाए गए बाल देखभाल अवकाश को लिंग-निरपेक्ष बनाने का सुझाव दिया गया है ताकि माता-पिता दोनों इसका लाभ उठा सकें। यह कदम कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समान रूप से साझा करने में मदद कर सकता है।
एनसीडब्ल्यू का यह प्रस्ताव आंगनबाड़ी और पूर्वप्राथमिक शिक्षा केंद्रों के विस्तार पर भी केंद्रित है। आयोग ने 2030 तक देश भर में 5 लाख नई बाल देखभाल सीटें स्थापित करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे कम आयु वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी।
यह पहल भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्तमान में, बाल देखभाल की जिम्मेदारी मुख्यतः महिलाओं पर होती है, जिससे वे कामकाजी जीवन में आगे बढ़ने में सीमित रहती हैं। एनसीडब्ल्यू का मानना है कि पर्याप्त और सुलभ बाल देखभाल सुविधाएं इस समस्या का समाधान कर सकती हैं।
आयोग की ओर से दिए गए सुझाव सरकार के विभिन्न विभागों और नीति निर्माताओं के पास विचार के लिए भेजे गए हैं। यदि ये प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं, तो भारत के कल्याण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण सुधार आ सकता है।