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नीरजा भनोट: जिन्होंने 379 यात्रियों की जान बचाई
पैन अमेरिकन एयरवेज की उड़ान 73 में आतंकवादियों के हमले के दौरान नीरजा भनोट ने यात्रियों के पासपोर्ट छिपाए और गोलियां सहीं। उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बचीं।
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कराची के अब्दुल सत्तार एडेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 सितंबर 1986 को जो घटना घटी, वह इतिहास में दर्ज रही। पैन अमेरिकन एयरवेज की उड़ान 73 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया। इस संकटपूर्ण स्थिति में 23 वर्षीय एयर होस्टेस नीरजा भनोट ने असाधारण साहस का परिचय दिया।
जब आतंकवादी यात्रियों की पहचान के लिए पासपोर्ट मांगने लगे, तब नीरजा ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने अमेरिकी और ब्रिटिश यात्रियों के पासपोर्ट छिपा दिए। इससे आतंकवादियों को सरलता से अपने लक्ष्य के यात्री नहीं मिल सके। उसी समय हवाई अड्डे पर आई कमांडो टीम के साथ गोलीबारी शुरू हो गई। इसी अराजक स्थिति में नीरजा ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने में मदद की।
इस साहसिक कार्रवाई के दौरान नीरजा को गोलियां लगीं। उन्होंने 379 यात्रियों की जान बचाई, लेकिन खुद शहीद हो गईं। उनकी यह बलिदान भारत और विश्व के इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय बन गया। नीरजा भनोट को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।