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हिमालय में कई आपदाओं का एक साथ खतरा, नेपाल की घटना से सबक
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हिमालय क्षेत्र में एक आपदा कई अन्य विनाशकारी घटनाओं को जन्म दे सकती है। नेपाल की हालिया आपदा इसी बहुस्तरीय खतरे का जीवंत उदाहरण है।
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हिमालय के उच्च क्षेत्रों में होने वाली कोई भी एक आपदा, जैसे हिमस्खलन या बर्फ-चट्टान का टूटना, एक के बाद एक घटनाओं की श्रृंखला शुरू कर सकता है। इससे नदियों में अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं, बाढ़ आ सकती है और नीचली ओर तेजी से विनाश फैल सकता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के नीति समर्थन प्रणाली के उप महानिदेशक प्रदीप सिंह के अनुसार, नेपाल की हालिया घटना इसी बहुआयामी खतरे को उजागर करती है।
सिंह के अनुसार हिमालयी क्षेत्र के खतरों का आकलन अलग-अलग करके नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, उपग्रह आधारित अवलोकन को क्षेत्रीय जांच और जमीनी उपकरणों द्वारा एकत्र किए गए डेटा के साथ जोड़ना आवश्यक है।
नेपाल की आपदा में उपग्रह विश्लेषण से एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। लांग्टांग लिरुंग हिमस्खलन स्थल के निकट पानी का एक जमाव पाया गया। 28 अगस्त की उपग्रह छवियों में लगभग 11 हेक्टेयर का जल संचयन क्षेत्र दिखाई दिया। यह साक्ष्य देता है कि प्रारंभिक बर्फ-चट्टान विफलता से नदी प्रणाली में अस्थायी अवरोध और जल का संचय हुआ था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बहुस्तरीय आपदाओं को समझने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा। आधुनिक प्रौद्योगिकी और पारंपरिक भूवैज्ञानिक अध्ययन दोनों को मिलाकर ही हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम किया जा सकता है।