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नेपाल में ग्लेशियर टूटने की चेतावनी में 38 मिनट का विलंब
नेपाल में सोमवार सुबह 8:37 बजे ग्लेशियर धराशायी हुआ, लेकिन आपातकालीन अलर्ट 9:15 बजे जारी किया गया। इस विलंब को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं कि आपदा चेतावनी प्रणाली में समय पर सूचना क्यों नहीं दी जा सकी।
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नेपाल के उत्तरी क्षेत्र में सोमवार सुबह एक बड़ा ग्लेशियर टूटने की घटना हुई, जिससे स्थानीय अधिकारियों और आपातकालीन प्रबंधन विभाग के बीच गंभीर समन्वय की खामियां सामने आई हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 8:37 बजे सुबह घटित हुई, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने 9:15 बजे तक औपचारिक आपातकालीन अलर्ट जारी नहीं किया।
यह 38 मिनट का अंतराल आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली में महत्वपूर्ण देरी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह समय जनता को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका देता है। नेपाल की आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली में इस तरह की देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
नेपाली अधिकारियों ने अभी तक इस विलंब के संबंध में विस्तृत व्याख्या प्रदान नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि संचार व्यवस्था और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी इसका मुख्य कारण हो सकती है। विशेषज्ञ समुदाय आपदा चेतावनी प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित करने और प्रतिक्रिया समय को कम करने की जरूरत पर जोर दे रहा है।
यह घटना पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती ग्लेशियर संकट की भी याद दिलाती है। नेपाल सहित दक्षिण एशियाई देशों में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से आने वाले दिनों में आपदाओं का खतरा और बढ़ने की आशंका है।