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नेपाल में बाढ़: वैज्ञानिकों ने महीनों पहले दी थी चेतावनी
नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ का संबंध हिमालय में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों से है। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट ने इस आपदा की पूर्वसूचना दी थी, जिसमें सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं।
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अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) की हाल की रिपोर्ट में हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तीव्र पिघलने और बढ़ते बाढ़ के जोखिम की चेतावनी दी गई थी। ये रिपोर्ट बताती हैं कि पिछले वर्षों में बर्फ की हानि की दर दोगुनी हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में आपदा का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल और तिब्बत में आई हाल की विनाशकारी बाढ़ का कारण ग्लेशियर के ढहने से उत्पन्न अचानक जलप्रवाह था। इस घटना में सैकड़ों लोग मारे गए और कई लोग अभी भी लापता हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे ग्लेशियर अधिक तेजी से सिकुड़ रहे हैं, जिससे ग्लेशियल झील के फटने से बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा और बढ़ गया है।
वैज्ञानिकों ने इंगित किया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये घटनाएं अधिक बार घटित हो सकती हैं। हिमालय क्षेत्र में पानी के संकट से बचने के लिए और इस तरह की सीमा पार आपदाओं की समझ बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय सहयोग और बेहतर निगरानी प्रणाली से भविष्य में इस तरह की आपदाओं से बचाव संभव है। नेपाल, भारत, तिब्बत और अन्य पड़ोसी देशों को मिलकर एक सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करनी होगी, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से समुदायों की रक्षा कर सके।