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हमास हमले के बाद नेतन्याहू का राजनीतिक अंत क्यों नहीं हुआ
7 अक्टूबर को हमास के विनाशकारी हमले के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक पतन निश्चित माना जा रहा था। लेकिन विभिन्न कारणों से वह न केवल अपने पद पर बने रहे, बल्कि राजनीतिक रूप से मजबूत भी हुए।
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7 अक्टूबर को हमास के आश्चर्यजनक सैन्य हमले ने इजरायल की सुरक्षा प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचाया। इस हमले में हजारों लोग मारे गए और व्यापक विनाश हुआ। ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपना पद छोड़ना होगा। हालांकि, उनके राजनीतिक विरोधियों के बीच भी गहरे मतभेद थे जो उनकी स्थिति को मजबूत करने में सहायक रहे।
इजरायली राजनीति में नेतन्याहू का दीर्घ अनुभव और गठबंधन सरकार में उनकी केंद्रीय भूमिका ने उन्हें संकट से बाहर निकालने का रास्ता दिया। विपक्षी दलों के विभाजित रुख और एकजुट चुनौती न दे पाने की असमर्थता से नेतन्याहू को मोटा मौका मिला। राष्ट्रीय संकट की घड़ी में राजनीतिक एकता की मांग ने भी उनकी स्थिति को कुछ हद तक सुरक्षित रखा।
गाजा में चल रहे सैन्य अभियान को जारी रखने की नीति को अपना समर्थन जताकर नेतन्याहू ने अपने दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार के सहयोगियों को साथ बनाए रखा। बहरहाल, हमास के हमले और उसके बाद की घटनाओं ने इजरायली समाज में गहरा आत्मचिंतन पैदा किया है। नेतन्याहू की राजनीतिक भविष्य पर अभी भी न्यायिक जांच और लोकमत का दबाव बना हुआ है।