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नेतन्याहू की राजनीतिक जीत: पराजय न होने का फायदा
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की शक्ति इस तथ्य में निहित है कि वह अब तक हारे नहीं हैं। उनके नेतृत्व ने इजराइली राजनीति को मौलिक रूप से बदल दिया है और किसी भी सत्तासीन गठबंधन को अब अरब नागरिकों को बाहर रखकर बनाना होगा।
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इजराइली राजनीति में नेतन्याहू की स्थिति इस सरल लेकिन शक्तिशाली वास्तविकता पर टिकी है कि वह अब तक किसी प्रतिद्वंद्वी के सामने पराजित नहीं हुए हैं। यह राजनीतिक जीत का एक अलग प्रकार है - न कि किसी दृष्टिकोण की व्यापक स्वीकृति से, बल्कि विकल्पों की अनुपस्थिति से उभरी है। इजराइली मतदाताओं ने विभिन्न चुनावों में अपनी असंतुष्टि व्यक्त करने के बावजूद, एक सुसंगत विरोधी गठबंधन को आकार नहीं दे सके जो नेतन्याहू को सत्ता से बाहर निकाल सके।
नेतन्याहू के शासनकाल का सबसे गहरा प्रभाव राजनीतिक संरचना में ही आया है। उन्होंने इजराइली राजनीति को इस तरह पुनर्गठित किया है कि किसी भी सत्तासीन गठबंधन को अब अरब नागरिकों को सीमांत करके बनाना आवश्यक हो गया है। यह परिवर्तन केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि राष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में एक स्थायी बदलाव का संकेत देता है। इससे पहले के दशकों में जो समावेशी गठबंधन संभव थे, वे अब असंभव प्रतीत हो रहे हैं।
इस राजनीतिक परिदृश्य का अर्थ है कि इजराइली राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण स्थापित हो गया है। भविष्य के किसी भी सरकार को इसी नई संरचना के भीतर काम करना होगा। चाहे नेतन्याहू सत्ता में रहें या उनकी जगह कोई और ले, इजराइली राजनीति के इस मौलिक परिवर्तन को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह परिवर्तन समाज के विभाजन की गहराई और राजनीतिक ध्रुवीकरण की व्यापकता को प्रतिबिंबित करता है।