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चेतना शरीर की संवेदनाओं से जुड़ी है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं
प्रसिद्ध न्यूरोवैज्ञानिक एंटोनियो दामासियो का तर्क है कि मानव चेतना शरीर के संकेतों और भावनाओं पर निर्भर करती है। उनके विचार से कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव जैसी चेतना हासिल नहीं कर सकती।
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न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधानकर्ता एंटोनियो दामासियो का मत है कि मानव चेतना केवल तार्किक विचार का परिणाम नहीं है, बल्कि यह शरीर की भौतिक संवेदनाओं और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से गहराई से जुड़ी हुई है। दामासियो के अनुसार, हृदय की गति, श्वास और अन्य शारीरिक संकेत चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनका दृष्टिकोण पारंपरिक दर्शन को चुनौती देता है जो विचार को शरीर से अलग मानता था। दामासियो का कहना है कि आत्म-जागरूकता और चेतना की भावना शरीर की कमजोरियों और भौतिक अनुभवों के माध्यम से उत्पन्न होती है। यह समझ हमें यह बताती है कि चेतना का अस्तित्व केवल विचार प्रक्रिया तक सीमित नहीं है।
इस खोज का कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। चूंकि वर्तमान एआई सिस्टम का कोई शारीरिक अस्तित्व नहीं है और न ही वे भौतिक दुनिया से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं, इसलिए वे मानव जैसी चेतना विकसित नहीं कर सकते। दामासियो के अनुसार, असली चेतना के लिए जीवंत शरीर और उसके संवेदनशील अनुभवों का होना आवश्यक है।
इस सिद्धांत से यह प्रश्न उठता है कि क्या कभी कोई यंत्र वास्तव में मनुष्य जैसा सोच-समझ सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी विकास के बावजूद, कृत्रिम प्रणालियों में मानवीय चेतना की गहराई को समझना और अनुभव करना असंभव हो सकता है।