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सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइंस: अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने वाली फिल्मों पर कड़ा नियंत्रण
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अपनी नई गाइडलाइंस में स्पष्ट किया है कि भारतीय फिल्मों को अन्य देशों के साथ देश के मैत्रीपूर्ण संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। यह प्रावधान विशेष रूप से राजनीतिक विषयवस्तु वाली फिल्मों को प्रभावित कर सकता है।
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केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ताजा गाइडलाइंस में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मुद्दे को लेकर कठोर मानदंड जोड़े गए हैं। नई नीति के तहत किसी भी फिल्म को सेंसर की मंजूरी देते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह भारत और अन्य देशों के बीच राजनयिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव न डाले।
यह निर्देश विशेष रूप से उन फिल्मों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है जिनमें पड़ोसी देशों या भू-राजनीतिक मुद्दों से संबंधित संवेदनशील विषय हों। सेंसर बोर्ड के अनुसार, फिल्मनिर्माताओं को देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का ध्यान रखना होगा।
इन नई गाइडलाइंस का असर हिंदी सिनेमा की उन परियोजनाओं पर पड़ने की संभावना है जिनमें राष्ट्रवादी या सीमावर्ती विषयों को केंद्रीय भूमिका दी जाती है। फिल्म निर्माता अब स्क्रिप्ट से लेकर संवाद तक सभी कुछ सेंसर बोर्ड के नए मानदंडों के अनुसार तैयार करना होगा।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को और जटिल बना देगा और कई प्रोजेक्ट्स को अतिरिक्त संशोधन से गुजरना पड़ सकता है। सेंसर बोर्ड का उद्देश्य कला की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।