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नई दिल्ली घोषणा से परे: भारत को व्यापार नीति में सुधार जरूरी
ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसे वास्तविक रूप देने के लिए भारत को अपनी व्यापार नीतियों और विश्व व्यापार संगठन सुधारों में तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
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ब्रिक्स सदस्य देशों द्वारा तैयार की गई नई दिल्ली घोषणा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। घोषणा में वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और प्रतिनिधिमूलक बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा की सफलता इसके कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।
भारत को विश्व व्यापार संगठन में आवश्यक सुधारों के लिए आक्रामक रुख अपनाना चाहिए। मौजूदा बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली विकसित देशों के पक्षधर मानी जाती है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होता है। भारत जैसे देशों को इस असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस प्रस्ताव लाने चाहिए।
घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए भारत को अपनी घरेलू व्यापार नीतियों में भी सुधार लाने होंगे। स्वच्छता, पारदर्शिता और विकास-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर भारत क्षेत्रीय व्यापार में अपनी नेतृत्व की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
आने वाले महीनों में भारत के कार्यों का सीधा असर ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सुधार के प्रयासों पर पड़ेगा। नई दिल्ली घोषणा का वादा तभी पूरा हो सकता है जब इसके पीछे मजबूत इच्छाशक्ति और ठोस कार्ययोजना हो।