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नए ई-कॉमर्स नियमों से छोटे विक्रेताओं पर अनुपालन का बोझ बढ़ेगा: विशेषज्ञ
सरकार के संशोधित ई-कॉमर्स नियमों का उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ और व्यापारी चिंता जता रहे हैं कि इससे छोटे विक्रेताओं और एमएसएमई पर अनुपालन का भारी बोझ पड़ेगा।
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उपभोक्ता कार्य विभाग द्वारा अधिसूचित नए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 को 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा। ये नियम 2020 के पुराने नियमों की जगह लेंगे और ऑनलाइन बाजारों पर लागू होंगे।
संशोधित ढांचे में रैंकिंग पैरामीटर का खुलासा, प्रायोजित सूचियों की जानकारी, छूट के दावों के लिए "पूर्व मूल्य" की अनिवार्य जानकारी, 2023 के डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों का पालन और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के साथ अनिवार्य साझेदारी शामिल है। ये प्रावधान उपभोक्ताओं की पारदर्शिता और सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
हालांकि, उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारियों का कहना है कि उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता को मजबूत करने का लक्ष्य स्वागत योग्य है, लेकिन कुछ प्रावधानों की छोटे विक्रेताओं और एमएसएमई के नजरिये से गहराई से जांच की जरूरत है। ऑनलाइन बाजारों पर अधिकांश विक्रेता ये छोटे व्यापारी होते हैं।
विशेषज्ञों का विचार है कि जहां ये नियम उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, वहीं उनके व्यावहारिक कार्यान्वयन में छोटे खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक और वित्तीय दबाव हो सकता है। संशोधित नियमों के प्रभाव और क्रियान्वयन के तरीके को लेकर विभिन्न हलकों में चर्चा जारी है।