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नई खनन नियमों में दंड की सीमा से प्रवर्तन कमजोर होने की चिंता
खनन क्षेत्र के विशेषज्ञों और हितधारकों का कहना है कि नए दंड नियम नागरिक जुर्माने की सीमा निर्धारित करके और जांच के बिना उल्लंघन निपटान की अनुमति देकर प्रवर्तन को कमजोर कर सकते हैं।
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खनन क्षेत्र को विनियमित करने वाले नए नियमों को लेकर विशेषज्ञों और उद्योग के प्रतिनिधियों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इन नियमों में नागरिक दंड की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है, जिससे उल्लंघन करने वाली कंपनियों के लिए जुर्माने में कटौती हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रावधान पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को रोकने में नियामक निकायों की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
नई व्यवस्था के तहत उल्लंघनकारियों को औपचारिक जांच के बिना अपने मामलों का निपटान करने का विकल्प दिया गया है। इस व्यवस्था से आशंका है कि कई मामले बिना उचित जांच और पारदर्शिता के सुलझाए जा सकते हैं। इससे खनन गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण में खामियां आ सकती हैं।
उद्योग के कुछ हिस्से इन नियमों को व्यावहारिक बताते हैं, जबकि पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर इन्हें प्रवर्तन को कमजोर करने वाला मानते हैं। विश्लेषकों का मत है कि नियामकीय कार्रवाई की प्रभावशीलता सीमित दंड प्रावधानों के कारण प्रभावित हो सकती है। खनन नीति के भविष्य को लेकर इन नियमों का व्यापक असर हो सकता है।