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कोलंबिया इंजीनियरों ने विकसित की रंगहीन कोटिंग, सतह को 6 डिग्री ठंडा रखती है
कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई सरंध्र बहुलक कोटिंग विकसित की है जो बिजली के बिना सतहों को परिवेशी तापमान से कम ठंडा रख सकती है। यह तकनीक पारंपरिक सफेद रंजकों की जगह नैनो-माइक्रोस्केल हवा के छिद्रों का उपयोग करके सूर्य का प्रकाश परावर्तित करती है।
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कोलंबिया इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी पॉलिमर कोटिंग विकसित की है जो पारंपरिक शीतलन प्रणालियों के बिना सतहों को आसपास की हवा से भी अधिक ठंडा रख सकती है। इस नई तकनीक में रंगहीन सामग्री का उपयोग किया गया है जो सूर्य के विकिरण को प्रभावी ढंग से परावर्तित करती है।
कोटिंग को सूक्ष्म वायु छिद्रों से युक्त बनाया गया है जो नैनो से माइक्रोस्केल के आकार में हैं। ये छिद्र सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने के साथ-साथ गर्मी को आकाश की ओर उत्सर्जित करते हैं, जिससे सतह का तापमान निरंतर कम रहता है। यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत के काम करती है।
क्षेत्रीय परीक्षणों में इस तकनीक की प्रभावशीलता स्पष्ट हुई। अरिजोना के सूर्य-प्रचंड क्षेत्र में किए गए परीक्षणों में सतह का तापमान परिवेशी तापमान से लगभग 6 डिग्री सेल्सियस कम रहा। भारत में बांग्लादेश के क्षेत्र में सतह तापमान में लगभग 3 डिग्री सेल्सियस की कमी देखी गई।
इस तकनीक का विकास बिना रंजक के शीतलन समाधान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में भवन निर्माण, ऊर्जा संरक्षण और जलवायु नियंत्रण अनुप्रयोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।