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नई कर व्यवस्था से Gen Z को मिल रहा फायदा, जटिल रिटर्न बढ़े
25 साल से कम उम्र के करदाताओं में से 76 प्रतिशत अब नई कर व्यवस्था के तहत जटिल रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। 12 लाख तक की सैलरी पर शून्य कर देयता संभव बनाने वाली इस व्यवस्था को युवा भारत अपना रहा है।
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भारत के युवा पेशेवरों के लिए नई कर व्यवस्था तेजी से लोकप्रिय हो रही है। 25 साल से कम उम्र के करदाताओं में से तीन-चौथाई से अधिक अब इसी व्यवस्था को अपना रहे हैं, जो पारंपरिक कर संरचना से अलग है। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण है सरलीकृत कर गणना और कम कर भार।
नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर न्यूनतम या शून्य कर देयता संभव हो गई है। यह विशेषकर उन युवा कर्मचारियों के लिए आकर्षक साबित हो रही है जिनकी आय इसी श्रेणी में आती है। सरकार द्वारा निर्धारित स्लैब दरें और कर लाभ इसे आकर्षक बनाते हैं।
हालांकि, व्यय और निवेश में अधिक स्वतंत्रता देने वाली पुरानी कर व्यवस्था के फायदे भी मौजूद हैं। उच्च आय वाले व्यक्तियों के लिए 80C के तहत निवेश में छूट और अन्य कटौतियां अभी भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। करदाता संख्या में वृद्धि और जटिल रिटर्न दाखिल करने की प्रवृत्ति बढ़ने से संकेत मिलता है कि युवा करदाता अपनी वित्तीय नियोजना के प्रति अधिक सचेत हो गए हैं।
कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रत्येक करदाता को अपनी आय, निवेश और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर दोनों व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए। नई व्यवस्था की सादगी के बावजूद, पुरानी व्यवस्था की छूट और कटौतियां कुछ मामलों में अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं।