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चेन्नई-तिरुपति राजमार्ग पर एनएचएआई ने पुनर्चक्रित बिटुमन का परीक्षण किया
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने चेन्नई-तिरुपति राजमार्ग के एक खंड पर पुनर्चक्रित बिटुमन का उपयोग करके सड़क निर्माण की नई तकनीक का परीक्षण किया। यह पहल टिकाऊ सड़क विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने चेन्नई-तिरुपति राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से पर पुनर्चक्रित बिटुमन का प्रायोगिक उपयोग शुरू किया है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़क निर्माण में पुरानी सड़क सामग्री के पुन: उपयोग की संभावनाओं का मूल्यांकन करना है।
पुनर्चक्रित बिटुमन का उपयोग सड़क निर्माण में लागत में कमी और पर्यावरणीय लाभ दोनों प्रदान कर सकता है। इस प्रौद्योगिकी के माध्यम से निर्मित सड़कों की गुणवत्ता और स्थायित्व का अध्ययन किया जा रहा है ताकि भविष्य में इसे व्यापक पैमाने पर लागू किया जा सके।
एनएचएआई का यह प्रयास भारत के बुनियादी ढांचा विकास में टिकाऊ तरीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर, सड़क निर्माण के मानकों में संशोधन किए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस तरह के नवोन्मेषी समाधान से न केवल निर्माण लागत में कमी आएगी, बल्कि सड़क निर्माण से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। आने वाले महीनों में इस परियोजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।