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महिला सुरक्षा: पीड़िता को शर्मिंदा करने से रोकने के लिए पुलिस संवेदनशीलता प्रशिक्षण जरूरी - एनएचआरसी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस कर्मियों को संवेदनशील बनाने की सुप्तावस की है। आयोग का मानना है कि उचित प्रशिक्षण से यौन अपराध की शिकार महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोका जा सकता है।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महिला सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण सुप्तावश दिया है। आयोग के अनुसार, पुलिस विभाग को अपने कर्मियों को विशेष संवेदनशीलता प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि यौन अपराध और महिला हिंसा के मामलों में पीड़ित महिलाओं को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति को रोका जा सके।
एनएचआरसी का मानना है कि पुलिस थाना स्तर पर होने वाली असंवेदनशील व्यवहार पीड़ित महिलाओं को न्याय पाने से रोकती है। कई मामलों में पुलिस कर्मी अपनी पूर्वाग्रहों के कारण पीड़ित को ही दोषी ठहराते हैं, जिससे महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास में कमी आती है। आयोग ने यह भी कहा है कि व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को महिलाओं की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
आयोग की सिफारिश के अनुसार, राज्य सरकारों को पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में महिला संवेदनशीलता को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। इसके अलावा, पुलिस बलों को नियमित अंतराल पर ताजा प्रशिक्षण दिए जाने चाहिए। एनएचआरसी का यह कदम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्यायिक व्यवस्था में समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।