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एनआईटी ड्रॉपआउट की सैलरी तीन हजार से बढ़कर 58 लाख सालाना हुई

पवन चिंदुकुरी का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में कंपनियों को प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को तलाशना चाहिए, न कि सिर्फ डिग्री और कॉलेज के आधार पर आंकलन करना चाहिए।

LSN India · 2 October 2026

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक न बन पाने वाले एक युवा ने अपने कौशल और दृढ़ संकल्प के बल पर बेहद प्रभावशाली करियर की सीढ़ियां चढ़ी हैं। पवन चिंदुकुरी की व्यक्तिगत यात्रा मात्र तीन हजार रुपये माहिक वेतन से शुरू होकर 58 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंची है।

चिंदुकुरी का यह सफल केस स्टडी भारतीय शिक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में कंपनियों का दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह एकमात्र मानदंड नहीं होना चाहिए।

चिंदुकुरी के अनुसार, किसी उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और सीखने की इच्छा अधिक महत्वपूर्ण हैं। तकनीकी क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उद्योग को उन प्रतिभाओं को पहचानने और निवेश करने की आवश्यकता है जो अपनी ताकत से अलग रास्ते बनाते हैं।

उनकी सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, निरंतर सीखने और व्यावहारिक कौशल विकास की कहानी है। यह दृष्टांत भारत के लाखों युवाओं को प्रेरित करता है कि परिस्थितियों या प्रारंभिक असफलताएं अंतिम परिणाम नहीं हैं। सही दिशा, दृढ़ता और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।