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कटहल के छिलकों को बर्बादी से बचाएंगे एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ता
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला के शोधकर्ताओं ने कटहल के छिलकों का उपयोग करने का एक नया तरीका खोजा है। यह पहल कृषि अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में परिवर्तित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
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कटहल एशिया के प्रमुख फलों में से एक है, लेकिन इसके प्रसंस्करण के दौरान उत्पन्न छिलके आमतौर पर कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं की एक टीम इन छिलकों के लिए एक उपयोगी अनुप्रयोग विकसित कर रही है, जिससे खाद्य उद्योग का पर्यावरणीय प्रभाव कम हो सकता है।
यह शोध परियोजना कृषि-आधारित अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतिनिधित्व करती है। कटहल के छिलकों में महत्वपूर्ण रासायनिक और पोषक तत्व होते हैं जिनका उपयोग विभिन्न औद्योगिक और कृषि अनुप्रयोगों में किया जा सकता है।
ऐसी पहल भारत के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य छोटे पैमाने के किसानों और बड़े खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों दोनों के लिए आर्थिक मूल्य सृजित करना है।
यदि यह तकनीक सफल साबित होती है, तो यह कटहल उत्पादन क्षेत्रों में आजीविका सुधार और पर्यावरण संरक्षण दोनों में योगदान दे सकती है। भारतीय तकनीकी संस्थानों द्वारा की गई ऐसी पहल देश के कृषि और उद्योग क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलती है।