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चिकित्सा विज्ञापन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनी रोगी गवाहियों पर एनएमसी प्रतिबंध
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने चिकित्सा विज्ञापनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित रोगी प्रशंसापत्र और नैदानिक परिणामों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञापन नैतिकता को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने चिकित्सा पेशेवरों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों के विज्ञापनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न सामग्री के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किया है। इसमें कृत्रिम रोगी गवाहियां, आभासी नैदानिक परिणाम और अन्य एआई-जनित दावे शामिल हैं। यह निर्णय चिकित्सा विज्ञापन में पारदर्शिता और सत्यता सुनिश्चित करने के लिए नियामक मानकों को सुदृढ़ करने का हिस्सा है। नियामक निकाय का मानना है कि कृत्रिम सामग्री का उपयोग रोगियों को गुमराह कर सकता है और चिकित्सा विज्ञापन क्षेत्र में विश्वास को नुकसान पहुंचा सकता है। इस प्रतिबंध के माध्यम से एनएमसी सभी विज्ञापनों में वास्तविक, प्रमाणित और सत्यापनीय सामग्री के उपयोग को अनिवार्य बना रहा है। चिकित्सा पेशेवरों को अपने सभी दावों को वैज्ञानिक शोध और वास्तविक रोगी अनुभवों पर आधारित करना होगा। एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि इस निर्देश का पालन न करने वाले चिकित्सकों और संस्थानों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।