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एनएमडीसी 2047 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य, 90% कटौती की योजना
भारतीय लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी ने 2047 तक अपने परिचालन उत्सर्जन को शून्य करने का महत्वाभिलाषी लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युतीकरण के माध्यम से कम से कम 90 प्रतिशत उत्सर्जन में कमी लाने की योजना बना रही है।
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राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) ने अपने परिचालन संबंधी कार्बन पदचिह्न को नाटकीय रूप से कम करने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम की घोषणा की है। सरकारी स्वामित्व वाली इस लौह अयस्क उत्पादक कंपनी का उद्देश्य 2047 तक नेट-जीरो ऑपरेशनल उत्सर्जन प्राप्त करना है, जो भारत के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है।
एनएमडीसी की महत्वाकांक्षी योजना में उत्सर्जन में कम से कम 90 प्रतिशत की कटौती करना शामिल है। यह लक्ष्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बड़े पैमाने पर संक्रमण, खनन और प्रसंस्करण संचालन के विद्युतीकरण, कम कार्बन ईंधन के उपयोग और कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन के माध्यम से हासिल किया जाएगा।
कंपनी भारत के स्टील और खनन क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कदम न केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को प्रदर्शित करता है बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और ऊर्जा दक्षता में निवेश को भी प्रतिफलित करता है।
एनएमडीसी का यह पहल भारत के 2070 तक कार्बन-तटस्थ बनने के आंतरराष्ट्रिक प्रतिश्रुति को मजबूत करता है। यह नई दिशा देश के प्रमुख राजस्व-जनरेटिंग सार्वजनिक उद्यमों में से एक के लिए एक नई आर्थिक और पर्यावरणीय मिसाल स्थापित करती है।