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किसी भी व्यक्ति या समूह को विरोध स्थल पर अनिश्चितकाल तक रहने का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर कब्जे की अवधि सीमित होनी चाहिए। यह निर्णय जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया।
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नई दिल्ली - भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को सरकार द्वारा निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय के इस निर्देश का उद्देश्य विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना है।
तीन सदस्यीय पीठ ने जुलाई महीने में हुए व्यापक प्रदर्शन के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित कई याचिकाओं की सुनवाई की। इन याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई पुलिस की कथित कठोर कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा कि जबकि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकाल तक रहना सामान्य जन-जीवन में बाधा डालता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों को उचित समय सीमा के भीतर अपने विरोध को संपन्न करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में होने वाले सामूहिक प्रदर्शनों के संचालन के तरीके को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी हितधारकों को विरोध का अधिकार और राज्य के हित दोनों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा है।