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लाखों मतदाताओं को अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं: सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तर्क से लाखों नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश का यह बयान चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच आया है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने मंगलवार को कहा कि किसी भी परिस्थिति में लाखों मतदाताओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश का यह कड़ा रुख वर्तमान चुनावी विवादों के बीच आया है जहां कुछ तर्क दिए जा रहे हैं कि किस तरह मतदान प्रक्रिया को संचालित किया जाए।
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोई भी तुलनात्मक तर्क या 'क्या तुम भी' वाली बहस इस मूल सिद्धांत को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। न्यायाधीश के अनुसार, संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रतिबंधित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को सर्वाधिक न्यायसंगत और आवश्यक कारण होना चाहिए।
यह टिप्पणी चुनाव आयोग द्वारा किए गए कुछ निर्णयों पर सवाल उठाने के संदर्भ में की गई है जिन पर कहा जा रहा है कि वे मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। न्यायालय ने माना है कि चुनावी सुधार आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन ये सुधार लोकतांत्रिक मूल्यों और मौलिक अधिकारों के साथ संतुलन बनाते हुए किए जाने चाहिए।