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न्यायमूर्ति भुयां ने कहा- सामूहिक मतदान अधिकार हनन को कोई भी बहाना न्यायसंगत नहीं

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुयां ने मतदान के अधिकार को कमजोर करने वाली किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध आगाह किया है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना आंतरिक रूप से मनमाना है।

LSN India · 4 October 2026

न्यायमूर्ति भुयां ने कहा- सामूहिक मतदान अधिकार हनन को कोई भी बहाना न्यायसंगत नहीं

भारतीय न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति उज्जल भुयां ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि जनता के मतदान के अधिकार को हरण करने के लिए कोई भी तर्क स्वीकार्य नहीं है। उनका यह बयान सांविधानिक मामलों से संबंधित वर्तमान विवाद के बीच आया है।

न्यायमूर्ति भुयां ने स्पष्ट किया कि सामूहिक रूप से किसी समुदाय या जनसंख्या को मतदान के अधिकार से वंचित करना न केवल निर्णयात्मक है, बल्कि यह भारतीय संविधान के मौलिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। उनके अनुसार, ऐसी कार्रवाई आंतरिक रूप से मनमानी होती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार को कमजोर करती है।

इस तरह की टिप्पणियां भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करती हैं। न्यायमूर्ति भुयां ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई जो नागरिकों के मूल अधिकारों को प्रभावित करती है, उसके प्रति सतर्क रहना आवश्यक है।

इस मुद्दे पर न्यायालय का रुख स्पष्ट करता है कि मतदान का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त एक मूल अधिकार है, और किसी भी परिस्थिति में इसे लापरवाही से नहीं हटाया जा सकता। न्यायमूर्ति की इस टिप्पणी से संदेश जाता है कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना न्यायपालिका का प्रमुख दायित्व है।