Politics · India Bureau
नोएडा जिलाधिकारी का सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध अपील
गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दे रहीं हैं जिसमें एक विद्यार्थी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी के लिए उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
LSN India ·

गौतम बुद्ध नगर जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अपने खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। हाईकोर्ट ने उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था जो उनके वेतन से काटे जाने थे।
यह मामला अप्रैल में नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। 25 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय की इतिहास स्नातक आक्रिति चौधरी को इसी विरोध प्रदर्शन के संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।
सितंबर 2 को हाईकोर्ट ने आक्रिति चौधरी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी नजरबंदी को रद्द कर दिया। न्यायालय ने पाया कि नजरबंदी का आधार राज्य द्वारा "गढ़ी गई" कहानी पर आधारित था। कोर्ट ने उनकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया, जब तक कि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी न्यायसंगत न हो।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी द्वारा नजरबंदी आदेश पारित करने के तरीके पर कड़ी आलोचना की थी। न्यायालय ने चेतावनी दी कि नौकरशाही द्वारा इस तरह की "तानाशाहीपूर्ण" कार्रवाई जारी रहने से उत्तर प्रदेश को एक अधिनायकवादी राज्य में तब्दील कर सकता है।