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उत्तरी केरल में थेय्यम: देवता बन जाता है आम इंसान, रात भर चलता है त्योहार
कन्नूर से 40 किलोमीटर दूर कव्वयी में श्री कथिवनूर वीरन मंदिर के कलियट्टम त्योहार के दौरान एक सामान्य व्यक्ति देवता का रूप धारण कर लेता है। इस अनोखे सांस्कृतिक अनुभव के लिए आगंतुकों को रातभर जागना पड़ता है।
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उत्तरी केरल की परंपराओं में थेय्यम का विशेष स्थान है। कन्नूर जिले के कव्वयी गांव में स्थित श्री कथिवनूर वीरन मंदिर में कलियट्टम का पर्व मनाया जाता है, जहां सामान्य मनुष्य देवता का रूप धारण करते हैं। यह केरल के सबसे गहन सांस्कृतिक अनुभवों में से एक माना जाता है।
थेय्यम परंपरा हजारों साल पुरानी है और केरल की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। कलियट्टम त्योहार के दौरान रातभर की सजीव नाटकीयता देखने के लिए हजारों लोग इस क्षेत्र में जमा होते हैं। मशालों की रोशनी में यह अनुष्ठान अत्यंत भावप्रवण और प्रभावशाली होता है।
इस त्योहार का अनुभव लेने के लिए आगंतुकों को रात भर जागना आवश्यक होता है। परंपरागत पोशाक, मुखौटे और मेकअप के साथ प्रदर्शनकारी देवताओं की भूमिका निभाते हैं। स्थानीय समुदाय इस आयोजन को गहरी आस्था और समर्पण के साथ संपन्न करता है।
यह अनुभव केवल एक दर्शनीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि केरल की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को समझने का माध्यम है। पर्यटकों के लिए थेय्यम के दौरान मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्था की जाती है ताकि वे इस अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव को करीब से देख सकें।