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पूर्वोत्तर के जिलों में दक्षिण भारत की ओर रोजगार की स्थापित प्रवासन श्रृंखलाएं
गुवाहाटी के एक विकास संगठन के सर्वेक्षण में उजागर हुआ है कि तीन राज्यों में 91 प्रतिशत प्रतिवादी आर्थिक संकट जैसे कृषि भूमि की कमी और कर्ज चुकाने के दबाव से प्रेरित होकर दक्षिण की ओर पलायन करते हैं।
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पूर्वोत्तर भारत के कई जिलों में दक्षिण भारत की ओर श्रमिक प्रवासन की एक सुस्थापित प्रणाली विकसित हो गई है। गुवाहाटी स्थित एक गैर-लाभकारी विकास संगठन द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि इन क्षेत्रों में रोजगार के लिए दक्षिण की ओर पलायन केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक सुव्यवस्थित पैटर्न बन गया है।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, तीनों राज्यों में शामिल 91 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपने पलायन के पीछे आर्थिक कारण बताए। कृषि भूमि की अपर्याप्तता, कर्ज का बोझ और आजीविका के सीमित साधन ये प्रमुख कारक हैं जो लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए बाध्य करते हैं। इन "पुश" कारकों के कारण लाखों श्रमिक बेहतर आय की खोज में दक्षिण की ओर जाते हैं।
विकास संगठन का यह अध्ययन दर्शाता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक संकट कितने गहरे हैं और यहां की जनता को रोजगार के लिए दूर प्रदेशों तक जाना पड़ता है। हालांकि इस प्रवासन से क्षेत्र में प्रेषण आय आती है, लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार और रोजगार सृजन की आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है।
इस सर्वेक्षण के परिणाम नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं कि पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय स्तर पर टिकाऊ आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने की तत्काल आवश्यकता है।