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रेलवे पटरियों में करंट: समझें खतरे और सुरक्षा नियम

भारतीय रेलवे की सभी पटरियों में विद्युत करंट नहीं बहता, लेकिन विद्युतीकृत लाइनें घातक हो सकती हैं। जानिए ट्रेन को ऊर्जा कैसे मिलती है और रेलवे ट्रैक के पास रहना क्यों असुरक्षित है।

LSN India · 11 October 2026

रेलवे पटरियों में करंट: समझें खतरे और सुरक्षा नियम

भारतीय रेलवे नेटवर्क में पटरियों के माध्यम से विद्युत करंट की उपस्थिति एक सामान्य गलतफहमी का विषय है। वास्तव में, केवल विद्युतीकृत रेलवे लाइनों में ही उच्च वोल्टेज करंट प्रवाहित होता है, जबकि देश की कई डीजल चालित लाइनों में ऐसा नहीं होता है।

विद्युतीकृत रेलवे प्रणाली में ट्रेनों को शक्ति देने के लिए ओवरहेड तारों के जरिए करंट आपूर्ति की जाती है। ये तार 25,000 वोल्ट तक विद्युत ले जा सकते हैं। पटरियां मुख्य रूप से ट्रेनों को यांत्रिक समर्थन प्रदान करती हैं, करंट संचरण के लिए नहीं। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में विद्युत पृथ्वी के माध्यम से भी बह सकता है।

रेलवे ट्रैकों के पास आना और पार करना अत्यंत जोखिमपूर्ण है। ओवरहेड तारों से उत्पन्न विद्युत, ट्रेनों की तेज गति, और विद्युतीकृत पटरियों पर पैर रखना—ये सभी कारक घातक परिणाम दे सकते हैं। भारत में हर वर्ष सैकड़ों लोग रेलवे दुर्घटनाओं में जीवन गंवाते हैं।

यात्रियों और आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कभी भी रेलवे पटरियों पर न चलें, ट्रेन के करीब न जाएं, और निर्धारित रास्तों और पुलों का ही उपयोग करें। रेलवे अधिकारी नियमित रूप से सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।