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रेजिमन कुट्टप्पन का उपन्यास 'द रिवर ऑफ ग्रे फ्लावर्स' साइबर दासता का चित्रण करता है
नया उपन्यास तमिलनाडु के एक दलित युवक की दर्दनाक यात्रा के माध्यम से ऑनलाइन घोटाले के अंदरूनी पहलुओं को उजागर करता है। रेजिमन कुट्टप्पन की इस महत्वपूर्ण कृति में डिजिटल युग में मानव शोषण के नए आयाम दिखाई देते हैं।
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साहित्यकार रेजिमन कुट्टप्पन का उपन्यास 'द रिवर ऑफ ग्रे फ्लावर्स' साइबर अपराध और मानव तस्करी के गंभीर मुद्दे को केंद्र में रखता है। यह कथा एक तमिल दलित युवक के जीवन का अनुसरण करती है जो एक संगठित घोटाले केंद्र की पकड़ में आ जाता है। उपन्यास पाठकों को इन अवैध ऑनलाइन संचालनों की अंधकारमय दुनिया में ले जाता है।
यह कृति साइबर दासता की वास्तविकता को उजागर करती है, जहां आर्थिक मजबूरी में पड़े लोगों का शोषण किया जाता है। कथानक के माध्यम से लेखक दिखाता है कि कैसे सामाजिक और आर्थिक असमानता इन अपराधों का आधार तैयार करती है। युवक की यात्रा पाठकों को इस बढ़ती समस्या की भयानकता से परिचित कराती है।
उपन्यास समकालीन भारतीय समाज में डिजिटल प्रौद्योगोलजी के दुरुपयोग और उससे जुड़े सामाजिक संकट को रेखांकित करता है। यह कार्य साहित्य के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सामाजिक विमर्श को आगे बढ़ाता है और पाठकों को इस गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति सचेत करता है। कुट्टप्पन की यह संवेदनशील कृति भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।