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यूपीआई पर बड़े लेनदेन के शुल्क को लेकर एनपीसीआई ने शुरू की बैंकों से बातचीत
भारत ने सोमवार को अपने भुगतान कानून में संशोधन किया है, जिससे कंपनियों को 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद राष्ट्रीय प्रतिभूति समाशोधन निगम ने बैंकों और भुगतान कंपनियों के साथ परामर्श शुरू किया है।
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राष्ट्रीय प्रतिभूति समाशोधन निगम (एनपीसीआई) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर बड़े लेनदेन के लिए शुल्क निर्धारण को लेकर बैंकों और डिजिटल भुगतान कंपनियों के साथ विस्तृत परामर्श कर रहा है। यह पहल भारत के भुगतान क्षेत्र के नियमों में हाल के बदलाव के बाद आयी है।
भारत सरकार ने सोमवार को अपने भुगतान विधान में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिसके तहत वित्तीय संस्थानों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की नई शक्तियां दी गई हैं। अब तक यूपीआई का एक प्रमुख आकर्षण इसकी शुल्क-मुक्त प्रकृति रही है।
एनपीसीआई के इस परामर्श का उद्देश्य उचित और संतुलित शुल्क संरचना तैयार करना है जो सभी हितधारकों के लिए व्यावहारिक हो। बैंकिंग और भुगतान उद्योग में इस कदम को डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत को कवर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
इस संशोधन से यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र के आर्थिक मॉडल में बदलाव आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उच्च-मूल्य के डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणाली के दीर्घकालिक स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।