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एफवाई27 की पहली तिमाही में एनआरआई जमा प्रवाह छह गुना बढ़कर 36.2 अरब डॉलर
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल से जुलाई 2026-27 में विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा यानी एफसीएनआर(बी) प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसी अवधि में भारतीय नागरिकों की विदेशी निवेश सीमा के तहत रेमिटेंस में भी चार दशमलव सात प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अनिवासी भारतीयों की जमा राशि में असाधारण वृद्धि हुई है। एफसीएनआर(बी) जमा प्रवाह अप्रैल से जुलाई के दौरान 34.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में छह गुना अधिक है। इस आंकड़े से एनआरआई निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्वास प्रदर्शित होता है।
कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह में एफसीएनआर(बी) जमा का प्रमुख योगदान है। 36.2 अरब डॉलर के कुल प्रवाह में से 34.53 अरब डॉलर का हिस्सा इसी श्रेणी से आया है, जो विदेशी मुद्रा संग्रहण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। ये जमा राशियां देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में सहायक साबित हो रही हैं।
इसी अवधि में भारतीय नागरिकों द्वारा विदेश में निवेश करने के लिए निर्धारित सीमा यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत बाहर भेजी जाने वाली राशि में 9.37 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भारतीय नागरिक अपनी पूंजी को वैश्विक बाजारों में लगाने के लिए सक्रिय बने हुए हैं।