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सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विदेशी छात्रों के कोटे से निजी संस्थानों में सीटें खाली रह गईं
सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में अनिवासी भारतीयों के लिए 15 प्रतिशत सीटें आवंटित किए जाने के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रबंधन कोटे की मांग में गिरावट देखी जा रही है। निजी संस्थानों में इस वर्ष 656 प्रबंधन कोटा सीटें खाली रह गईं।
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सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में विदेशी छात्रों के लिए कोटा बढ़ने के कारण निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रबंधन कोटे की सीटों के प्रति आवेदकों की रुचि में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकारी संस्थानों में 15 प्रतिशत सीटें अनिवासी भारतीय छात्रों के लिए आरक्षित किए जाने के बाद यह प्रवृत्ति देखी जा रही है।
वर्तमान प्रवेश चक्र में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की 656 प्रबंधन कोटा सीटें भरी नहीं जा सकीं। विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में विदेशी छात्रों को दिए जाने वाले इस अवसर के कारण परिवार अपने बच्चों को सार्वजनिक क्षेत्र के कॉलेजों में प्रवेश के लिए वरीयता दे रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी संस्थानों की उच्च फीस छात्रों को निजी कॉलेजों की ओर आकर्षित नहीं कर पा रही है, खासकर जब सरकारी कॉलेजों में समान गुणवत्ता और कम खर्च में शिक्षा का विकल्प उपलब्ध है।
इस स्थिति ने निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है, जो अब अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आवेदकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर विचार कर रहे हैं।