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NSE की सार्वजनिक सूचीबद्धता से पहले BSE से तुलना करें
राष्ट्रीय शेयर बाजार अपने शेयर जनता को सौंपने की तैयारी कर रहा है। पिछले दस वर्षों में दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों ने शेयरधारकों को दिए गए लाभांश, बोनस और स्टॉक स्प्लिट की तुलना यहां देखें।
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भारत के दो प्रमुख शेयर एक्सचेंजों - नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने शेयरधारकों को मूल्य प्रदान करने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग किया है। NSE की आसन्न सार्वजनिक सूचीबद्धता के साथ, निवेशक दोनों संस्थानों की तुलनात्मक शेयरहोल्डर रिटर्न नीति में रुचि ले रहे हैं।
पिछले एक दशक में, दोनों एक्सचेंजों ने नियमित लाभांश भुगतान के माध्यम से अपने शेयरधारकों को आय प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, दोनों ने बोनस शेयर जारी किए हैं और स्टॉक स्प्लिट का कार्यान्वयन किया है, जो बाजार में शेयरों की तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
BSE और NSE की कैपिटल रिटर्न नीतियां उनके विकास के चरण और वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाती हैं। ये कदम न केवल मौजूदा शेयरधारकों को लाभ प्रदान करते हैं, बल्कि नई सार्वजनिक सूचीबद्धता के समय संभावित निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत भी भेजते हैं।
NSE की आने वाली IPO शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण विकास है, और विश्लेषकों का मानना है कि यह भारतीय वित्तीय बाजारों में आस्था को दर्शाता है। निवेशक इस सूचीबद्धता से पहले दोनों एक्सचेंजों की ऐतिहासिक शेयरहोल्डर रिटर्न नीतियों का मूल्यांकन कर रहे हैं।