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ओडिशा: पूर्व सरकार के स्कूल विकास कार्यक्रम में वित्तीय अनियमितता
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने ओडिशा के पिछली सरकार द्वारा चलाए गए उच्च विद्यालय रूपांतरण कार्यक्रम में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई हैं। इन खामियों में निधि का दुरुपयोग और विनियोग संबंधी नियमों की अनदेखी शामिल है।
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट में ओडिशा सरकार के पूर्ववर्ती प्रशासन द्वारा संचालित उच्च विद्यालय परिवर्तन कार्यक्रम में बड़ी वित्तीय खामियां उजागर हुई हैं। सीएजी के विस्तृत लेखापरीक्षा में योजना के क्रियान्वयन के दौरान मानदंडों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन न किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, योजना से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में धन का अनुचित व्यय देखा गया है। बिना उचित अनुमोदन के व्यय किए गए निधि से लेकर कार्यान्वयन में पारदर्शिता का अभाव तक, कई महत्वपूर्ण खामियां दर्ज की गई हैं। सीएजी ने इन विसंगतियों के संबंध में राज्य सरकार से उचित कार्रवाई की अपेक्षा की है।
यह कार्यक्रम राज्य के स्कूलों के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार के लिए शुरू किया गया था। तथापि, सीएजी की जांच से पता चलता है कि संसाधनों का उपयोग निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में कितना प्रभावी रहा, इस पर गंभीर सवाल उठते हैं।
इस रिपोर्ट के बाद मौजूदा ओडिशा सरकार से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह पूर्ववर्ती प्रशासन द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं की जांच करे और सुधारात्मक उपाय अपनाए। शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निधि के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।