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राज्यपाल का राजनीतिक भूमिका पर विवाद, ओड़िशा में नई बहस

ओड़िशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने शपथ लेने से पहले ही विवाद में आ गए हैं। उन्होंने राज्य के अनुसूचित जाति समुदाय में दलीय संगठन को मजबूत करने की बात कही है।

LSN India · 15 October 2026

संवैधानिक पद पर राज्यपाल की राजनीतिक भूमिका को लेकर ओड़िशा में नया विवाद सामने आया है। नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम के बयान ने इस बारे में सवाल उठाए हैं कि क्या राज्यपाल को अपनी राजनीतिक पार्टी के संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के तहत संवैधानिक प्रमुख के रूप में परिभाषित है। परंपरागत रूप से, इस पद को राजनीतिक विचारधारा से परे रहना चाहिए। हालांकि, अतीत में अलग-अलग राज्यपालों द्वारा की गई कार्रवाइयों को लेकर विभिन्न विवाद उत्पन्न हुए हैं।

राज्यपालों की स्वतंत्रता और उनकी जवाबदेही के मुद्दे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में मतभेद रहे हैं। कुछ का मानना है कि राज्यपाल को पूरी तरह तटस्थ रहना चाहिए, जबकि अन्य का तर्क है कि वे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से संबंधित हो सकते हैं।

ब्रज मोहन राम की नियुक्ति के बाद से राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए पक्षपातपूर्ण राजनीति से दूर रहना चाहिए।