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ओडिशा के मजदूर ने मलयालम न जाने इंजीनियरिंग डिग्री हासिल की
आर्थिक तंगी और भाषा की बाधा को पार करते हुए ओडिशा के एक प्रवासी मजदूर ने केरल के कन्नूर जिले से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रुमेंटेशन में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। रिंकु उठान सिंह की यह सफलता आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
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केरल के कन्नूर जिले में स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रुमेंटेशन में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले रिंकु उठान सिंह ने कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को सच करने का प्रमाण दिया है। ओडिशा से पलायन कर केरल आने वाले इस युवा को न केवल आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बल्कि मलयालम भाषा की अनजानी दुनिया में भी अपनी शिक्षा पूरी करनी पड़ी।
रिंकु के परिवार के पास न तो सुरक्षित आजीविका का साधन था और न ही शिक्षा प्राप्त करने का कोई निश्चित रास्ता। एक प्रवासी मजदूर के रूप में काम करते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। चेंपेरी स्थित कॉलेज में उन्हें न केवल नई तकनीकी ज्ञान मिला, बल्कि एक नई भाषा और संस्कृति को समझने का मौका भी मिला।
उनकी इंजीनियरिंग डिग्री का हासिल होना केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि हजारों प्रवासी परिवारों के लिए यह संदेश है कि आर्थिक बाधाएं और भाषा की कठिनाई किसी के सपनों को पूरा होने से नहीं रोक सकती। रिंकु उठान सिंह का यह सफर उन सभी युवाओं को प्रेरित करता है जो सीमित संसाधनों में बड़े लक्ष्य देखते हैं।