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ओडिशा: खनन निधि स्टेडियम और सड़कों पर खर्च, प्रभावित क्षेत्रों को नहीं मिला
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में ओडिशा के खनन क्षेत्रों के विकास के लिए दुरुपयोग का खुलासा हुआ है। छह लेखा परीक्षित DMF से 22,500 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र हुए, लेकिन किसी ने भी अनिवार्य एंडाउमेंट फंड की स्थापना नहीं की।
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ओडिशा के खनन क्षेत्रों में भारी रकम का दुरुपयोग हो रहा है। CAG की एक रिपोर्ट के अनुसार, खनन क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई गई निधि का बड़ा हिस्सा स्टेडियम निर्माण और सड़कों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। इससे खनन से प्रभावित क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
CAG की जांच में सामने आया कि छह लेखा परीक्षित DMF (Damage Mitigation Fund) में 22,500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा हुई है। हालांकि, विधिवत प्रावधानों के बावजूद इनमें से किसी भी निधि ने अनिवार्य एंडाउमेंट फंड की स्थापना नहीं की है। यह फंड खनन गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए आवश्यक है।
खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय नुकसान और स्थानीय आजीविका पर असर पड़ना एक गंभीर मुद्दा है। इन निधियों का मूल उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास और विकास सुनिश्चित करना है। लेकिन CAG की रिपोर्ट दर्शाती है कि धन का सही दिशा में उपयोग नहीं हो रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब खनन क्षेत्रों में निधि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ऐसी रिपोर्टें प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुचित निरीक्षण और नियमन के बिना खनन क्षेत्रों का विकास संभव नहीं है।