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खनन अधिनियम के प्रभाव का अभी आकलन नहीं: ओडिशा मंत्री
संसद द्वारा किए गए हालिया संशोधनों ने राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्तियों को सीमित कर दिया है। ओडिशा के विधायकों ने राजस्व में संभावित नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है।
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ओडिशा के एक मंत्री ने स्वीकार किया है कि खनन अधिनियम में किए गए संशोधनों के वास्तविक प्रभाव का अभी तक पूर्ण आकलन नहीं किया जा सका है। संसद द्वारा अनुमोदित इन संशोधनों ने राज्य सरकारों की खनिज अधिकारों और खनिज वाहक भूमि पर कर, उपकर तथा अन्य शुल्क लगाने की शक्तियों में कटौती की है।
विधायकों ने इन संशोधनों से राज्य के राजस्व में गंभीर नुकसान होने की संभावना जताई है। खनन क्षेत्र ओडिशा की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र से होने वाली आय राज्य के विकास परियोजनाओं को वित्त पोषित करती है।
मंत्री ने बताया कि सरकार इन संशोधनों के दूरगामी परिणामों को समझने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर रही है। इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है क्योंकि खनन नीति के कई पहलू हैं जिन्हें विस्तार से देखना होगा।
राज्य सरकार केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सहयोग की अपेक्षा कर रही है ताकि राज्य के हितों की रक्षा की जा सके। विधायकों का कहना है कि संशोधनों के क्रियान्वयन से पहले इसके प्रभाव का संपूर्ण विश्लेषण आवश्यक था।