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अनाथ बालक को झूठे माता-पिता के नाम से परेशानी, ओडिशा आयोग जांच करेगा
ओडिशा के अनाथ बालक को शिक्षा और सरकारी सहायता से वंचित रखा जा रहा है क्योंकि बाल देखभाल संस्थाओं ने उसके प्रमाणपत्रों में काल्पनिक माता-पिता के नाम दर्ज किए हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में जांच का आदेश दिया है।
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ओडिशा राज्य मानवाधिकार आयोग ने एक गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया है। एक अनाथ बालक को विभिन्न बाल देखभाल संस्थाओं ने अलग-अलग काल्पनिक माता-पिता के नाम से दस्तावेज़ तैयार किए हैं, जिससे उसके शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर बाधाएं आ रही हैं।
इस बालक के विभिन्न प्रमाणपत्रों में माता-पिता के नाम में असंगति होने से वह सरकारी छात्रवृत्ति, अनुदान और अन्य सहायता प्राप्त नहीं कर पाया है। शिक्षा संस्थाएं दस्तावेज़ों में विसंगति के कारण उसका नामांकन स्वीकार करने में असमर्थ रही हैं। यह स्थिति बालक के भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
मानवाधिकार आयोग की जांच अब इस मामले की पूरी पृष्ठभूमि को उजागर करेगी। आयोग यह पता लगाएगा कि किस कारण विभिन्न संस्थाओं ने एक ही बालक के लिए अलग-अलग माता-पिता के नाम दर्ज किए और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
यह घटना बाल देखभाल प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता की कमी को दर्शाती है। अनाथ बालकों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है और आयोग की कार्रवाई समान स्थिति में फंसे अन्य बालकों के लिए भी पथप्रदर्शक हो सकती है।