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ओडिशा का एसईबीसी आयोग निर्णय आरक्षण से आगे: धर्मेंद्र प्रधान
ओडिशा में एसईबीसी आयोग की स्थापना से अल्पसंख्यक समुदायों का सटीक प्रतिनिधित्व स्थानीय निकायों में सुनिश्चित होगा। इससे ग्रामीण और शहरी स्वशासन संस्थाओं में इन समुदायों के मुद्दों को उचित मंच मिलेगा।
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ओडिशा सरकार द्वारा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) आयोग की स्थापना केवल आरक्षण नीति का तकनीकी पहलू नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक कदम है। पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, यह निर्णय पिछड़े समुदायों की वास्तविक संख्या, उनके प्रतिनिधित्व और उनकी समस्याओं को सही ढंग से समझने का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस आयोग की स्थापना से राज्य के ग्रामीण और शहरी स्वशासन संस्थानों में एसईबीसी समुदायों की भागीदारी में वृद्धि होगी। यह कदम सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के प्रति ओडिशा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस आयोग के माध्यम से राज्य सरकार इन समुदायों के लिए नीति निर्माण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना सकेगी। आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई नीति से अधिक प्रभावी और लक्षित कार्यक्रमों का निर्माण संभव होगा।
यह पहल न केवल आरक्षण के दायरे में सुधार लाता है, बल्कि स्थानीय शासन प्रणाली को अधिक प्रतिनिधिमूलक और जवाबदेह बनाने का प्रयास है। ओडिशा इस तरह के सुधार से अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण स्थापित कर रहा है।