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ओडिशा में लाल चींटियों से बनती है तीखी चटनी
मयूरभंज जिले में स्थानीय समुदाय पेड़ों से लाल बुनकर चींटियां एकत्र करके उन्हें पारंपरिक मसालेदार चटनी में रूपांतरित करता है। यह अनोखी खाद्य संस्कृति पीढ़ियों से चली आ रही है।
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ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक अनूठी पाक परंपरा जीवित है जहां लाल बुनकर चींटियों को वृक्षों के घोंसलों से संग्रहित करके स्वादिष्ट चटनी तैयार की जाती है। यह परंपरागत व्यंजन स्थानीय लोगों के भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है और इसमें चींटियों के अंडे भी शामिल होते हैं।
इस चटनी को तैयार करने की प्रक्रिया सरल किंतु श्रमसाध्य है। स्थानीय समुदाय के सदस्य पेड़ों पर बने घोंसलों से लाल चींटियों को सावधानीपूर्वक एकत्र करते हैं और फिर उन्हें विभिन्न मसालों के साथ पीसकर चटनी का रूप देते हैं। इस प्रक्रिया में पारंपरिक ज्ञान और कौशल का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
यह चटनी न केवल अपने तीखे और अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि इसमें पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। स्थानीय आहार में इसका उपयोग चावल और अन्य मुख्य खाद्य पदार्थों के साथ किया जाता है।
मयूरभंज की यह पाक परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है और कई पीढ़ियों से इसी तरीके से तैयार की जाती आ रही है।