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ओडिशा में वन्यजीव तस्करों के लिए सुरक्षित आश्रय: पर्यावरण संगठन
पर्यावरणीय समूहों ने ओडिशा पर बाघ और हाथी तस्करों को पकड़ने में विफल रहने का आरोप लगाया है। प्रमुख वन्यजीव संरक्षण अधिकारी ने इस दावे को खारिज किया लेकिन सजा की दर कम होने को स्वीकार किया।
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ओडिशा की वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं जब पर्यावरण संरक्षण समूहों ने राज्य को वन्यजीव तस्करों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बताया है। इन संगठनों ने दावा किया है कि बाघ और हाथी की तस्करी में लिप्त अपराधियों के विरुद्ध न्यायिक कार्रवाई में राज्य की निष्क्रियता चिंताजनक है।
राज्य के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण अधिकारी ने सजा न होने की बात को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया है कि वन्यजीव तस्करी के मामलों में सजा की दर काफी कम है, जो आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए चिंताजनक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम सजा दर और लंबी न्यायिक प्रक्रिया तस्करों को निर्भय बनाती है। ओडिशा दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाता है, जहां बाघ और हाथी की महत्वपूर्ण आबादी है।
राज्य सरकार से वन्यजीव संरक्षण कानून को अधिक कड़ाई से लागू करने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सजा की दर में वृद्धि से ही तस्करी के खिलाफ प्रभावी निरोध हो सकता है।