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नियामगिरि की खानों के खिलाफ आदिवासियों का दृढ़ संकल्प
ओडिशा के नियामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन की परियोजना को लेकर आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपना पुरातन रुख दोहराया है। 2013 में बारह ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से इस खनन प्रस्ताव को खारिज किया था।
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ओडिशा के नियामगिरि पहाड़ियों में खनन परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय ने अपना विरोध दोबारा दर्ज किया है। जनजातीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पवित्र पहाड़ी क्षेत्र में बॉक्साइट खनन से संबंधित प्रस्ताव को लेकर उनकी स्थिति पिछले एक दशक से अपरिवर्तित है।
2013 में इस क्षेत्र की बारह ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति के साथ खनन परियोजना को खारिज कर दिया था। उस समय यह निर्णय पहाड़ियों को पवित्र मानने वाली स्थानीय आदिवासी जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं का प्रतिफलन था।
वर्तमान में खनन प्रस्ताव के नवीकृत प्रयासों के बीच आदिवासी समुदाय ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध अटूट रहेगा। स्थानीय प्रतिनिधियों का तर्क है कि नियामगिरि की पहाड़ियां न केवल उनकी सांस्कृतिक विरासत का अंग हैं बल्कि जल संसाधन और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
आदिवासी नेताओं ने जोर देते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि से क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और इसलिए इस परियोजना का विरोध अब भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था।