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तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों को दबाव, दूसरी तिमाही में लाभ
भारतीय तेल विपणन कंपनियां दूसरी तिमाही में शोधन मार्जिन में सुधार और एलपीजी घाटे में कमी के कारण लाभदायक परिणाम दिखा सकती हैं। हालांकि, वित्त वर्ष के दूसरे भाग में तेल की बढ़ती कीमतें उनके लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।
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तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लाभांश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में इन कंपनियों के लिए राहत की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि तेल शोधन के मार्जिन में सुधार और एलपीजी के अनुचित मूल्य निर्धारण में कमी दिख रही है।
शोधन क्षमता का बेहतर उपयोग और तेल उत्पादों की मांग में वृद्धि ने OMCs को अच्छे परिणाम प्रदान करने में मदद की है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडरों पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ भी पिछली तिमाहियों की तुलना में कम रहा है, जिससे इन कंपनियों के खर्च में कटौती हुई है।
हालांकि, चिंताजनक पहलू यह है कि वित्त वर्ष के दूसरे भाग में तेल की कीमतें अधिक रहने की संभावना है। यदि तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो OMCs को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। सरकार द्वारा तेल उत्पादों की कीमत नियंत्रित रखने की नीति के कारण, कच्चे तेल की महंगाई का बोझ इन कंपनियों को ही उठाना पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतें यदि वर्तमान स्तर से और भी ऊपर चली जाएं, तो OMCs के वार्षिक परिणाम में भी गिरावट आ सकती है। इसलिए, इन कंपनियों की आने वाली तिमाहियों में वित्तीय स्थिति मजबूत रहने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आवश्यक है।