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हार्मुज जलडमरूमध्य और रूस जोखिम से तेल 100 डॉलर तक जा सकता है

मिराए एसेट शेयरखान का मानना है कि कच्चे तेल की बाजार संतुलन 2026 तक घाटे में रहने की संभावना है। होरमुज़ जलडमरूमध्य और रूस से संबंधित भू-राजनीतिक जोखिम तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा सकते हैं।

LSN India · 4 September 2026

हार्मुज जलडमरूमध्य और रूस जोखिम से तेल 100 डॉलर तक जा सकता है

कच्चे तेल के बाजार में संरचनात्मक कमी बनी रहने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय कीमतें आने वाले महीनों में ऊपर की ओर दबाव का सामना करेंगी। मिराए एसेट शेयरखान के विश्लेषण में पाया गया है कि तेल की आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन आने वाले वर्षों में बना रहेगा, जो मूल्य वृद्धि के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

हार्मुज जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक तनाव और रूस संबंधी मुद्दे तेल की कीमतों को अस्थिर कर सकते हैं। ये क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और यहां की अनिश्चितता बाजार में तेजी ला सकती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि ये कारक तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक ले जा सकते हैं।

2026 तक तेल की कमी बनी रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देशों को विशेष चिंता हो सकती है। ऊंची तेल की कीमतें महंगाई बढ़ाने और मुद्रास्फीति नियंत्रण को कठिन बनाने में मदद कर सकती हैं। इसलिए इस क्षेत्र की सरकारों को तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव से निपटने की रणनीति तैयार करनी होगी।

तेल बाजार में आने वाली अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों और नीति निर्धारकों को ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने से न केवल आयात बिल कम होगा बल्कि पर्यावरणीय लाभ भी मिलेंगे।