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ओणम 2026: केरल का दस दिवसीय पर्व, इतिहास और महत्व
ओणम केरल का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है जो राजा महाबली की वापसी का जश्न मनाता है। यह पर्व दस दिनों तक चलता है और परंपरा, संस्कृति और सामूहिक खुशियों का प्रतीक है।
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ओणम केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे प्रमुख त्योहार है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह पर्व राजा महाबली के आगमन का स्वागत करता है, जो कभी केरल के क्षेत्र पर शासन करते थे। महाबली को न्यायप्रिय और उदार शासक माना जाता है, जिनका राज प्रजा के बीच समृद्धि और खुशहाली लाया था।
हिंदू पौराणिक आख्यानों में कहा गया है कि भगवान विष्णु के अवतार वामन ने महाबली को तीन पग में पृथ्वी नाप ली थी। महाबली को पाताल लोक भेज दिया गया था, किंतु भक्तों की प्रार्थना पर भगवान ने उन्हें साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दे दी। ओणम का त्योहार इसी पौराणिक घटना के स्मरण में मनाया जाता है।
ओणम के दस दिवसीय उत्सव में परिवार के सदस्य एक साथ आते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। इस अवधि में फूलों की सजावट, पारंपरिक नृत्य, खेल-कूद और विशेष भोजन तैयारी की परंपरा है। ओणम नई फसल के आगमन का भी प्रतीक माना जाता है।
यह त्योहार धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। ओणम केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि केरल के सभी समुदायों के लोग इसे मनाते हैं। इससे क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश मिलता है।