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नौ साल में करीब 20 प्रतिशत पंजीकृत कारखाने निष्क्रिय रहे
भारत में पंजीकृत कारखानों की संख्या हाल के वर्षों में बढ़ी है, लेकिन औद्योगिक क्षमता में वृद्धि नहीं हुई है। वित्त वर्ष 2024 और 2025 में कारखानों की संख्या में क्रमशः 2.66 प्रतिशत और 2.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
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वित्त वर्ष 2016 से 2025 तक की अवधि में भारत के करीब 20 प्रतिशत पंजीकृत कारखाने निष्क्रिय रहे हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि महज कारखानों की संख्या में वृद्धि औद्योगिक विकास का सटीक संकेतक नहीं है।
हाल के वर्षों में कारखानों की संख्या में सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। वित्त वर्ष 2024 में यह वृद्धि 2.66 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025 में 2.64 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, यह संख्यात्मक बढ़ोतरी वास्तविक औद्योगिक क्षमता में समानुपातिक वृद्धि को दर्शाती नहीं है।
कारखानों की निष्क्रियता के मुद्दे को संबोधित करना भारत के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। एक बड़ी संख्या में पंजीकृत कारखाने वास्तव में उत्पादन क्षमता का उपयोग नहीं कर रहे हैं, जो संसाधनों के अदक्ष उपयोग का संकेत देता है।
नीति निर्माताओं को इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि केवल कारखानों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बल्कि, मौजूदा कारखानों को सक्रिय रखना और उनकी कार्यक्षमता में सुधार करना अधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए बेहतर नीतियां, सुधारी गई आपूर्ति श्रृंखला और निवेश में वृद्धि जरूरी है।